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अभिज्ञान सरोकार जो श्रेष्ठ गुणवत्ता, कठोर परिश्रम तथा सर्वश्रेष्ठ परिणाम का नाम है स्वयं में परिवर्तन की तरफ अग्रसर है तथा यह संस्थान अब ”अध्ययन से प्रशासन की ओर” अग्रसर है।
अभिज्ञान सरोकार जिसकी स्थापना वर्ष 2011 में हुई थी ने स्वयं को समय के साथ कड़ी प्रतिस्पर्धा करते-करते अपना मुकाम बना लिया है जिसका परिणाम इस संस्थान को एक कोचिंग “संस्थान से बढ़कर” “भविष्य निर्माता” के रूप में देखा जाना है। इस संस्थान ने वर्ष 2011 से प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अभ्यर्थियों का सफल मार्गदर्शन प्रदान किया है तथा संस्था ने समय के साथ बदलते परीक्षाओं के अनुरूप स्वयं को बदला है तथा इसका ही परिणाम है ।

अध्ययन से प्रशासन की ओर….
प्रशासन का सामान्य का मतलब राजस्थान प्रशासनिक सेवा जो राजस्थान की सर्वोच्च सेवा के साथ-साथ समाज में प्रतिष्ठिता का सूचक है।

इस परीक्षा के आंकड़े बताते हैं की पचास प्रतिशत सलेक्टेड विद्यार्थी वे होते हैं जिनके पास फर्स्ट डिवीजन की डिग्री नहीं होती । इन आंकड़ों को देखने के बाद मन में एक सवाल सहज रुप से ही उठता है कि क्या जिस RAS की परीक्षा के लगभग चार- पांच लाख विद्यार्थी एप्लाई करते हैं, उनमें से एक हजार विद्यार्थी भी ऐसे नहीं होते, जो टॉपर रहे हो या कम से कम फर्स्ट डिवीजन तो रहे हो ? निश्चित तौर पर इनकी संख्या कई हजार की होती है । तो ऐसा क्यों होता है कि यह टॉपर लिस्ट से बाहर हो जाते हैं और उस लिस्ट में सेकंड और थर्ड डिवीजन तक को ही जगह मिल जाती है ? ऐसा नहीं है कि यह इत्तेफाक भी हो जाता है जिसे आप “बिल्ली के बाद छिंका टूटना” का नाम दे सकते हैं । RAS की परीक्षा में तुक्का नहीं लगता और चलिए मान लेते कि कभी-कभी लग भी जाता है तो वह पचास प्रतिशत पर तो नहीं लगेगा ।

इस तथ्य को साफ तौर पर प्रमाणित करता है कि यह सेैकंड और थर्ड डिवीजन विद्यार्थी व विद्यार्थी है जिन्होंने अपने आप को प्रतियोगी परीक्षा के अनुकूल ढाल लिया । जो टॉपर और फर्स्ट डिवीजन इसमें नहीं आ पाए , वे विद्यार्थी थे जो विश्वविद्यालय परीक्षा के पैटर्न पर ही RAS की परीक्षा देते रहें और लिस्ट से बाहर हो गए ।

RAS की तैयारी के दौरान आप इस सत्य की उपेक्षा कतई ना करें – फिर चाहे बात किसी लेखक की लिखी हुई किताब की हो या फिर किसी कोचिंग संस्थान कि।आपमें वह क्षमता और शक्ति होती है कि आप अपने स्तर से किसी भी वस्तु की कीमत को कई गुणा बढ़ा सकते हैं और घटा भी सकते है । यदि आपने RAS बनने का फैसला कर ही लिया है तो राज्य की इस सबसे बड़े कटिन दंगल में आपका स्वागत है। मेरी शुभकामनाएँ भी है और ईश्वर से आपके लिए प्रार्थना भी है कि वह लंबे समय तक आपके धैर्य,आपके आत्मविश्वास और आपके जोश को बनाए रखें ।

कोचिंग का अर्थ ‘गाइडेंस’ से है बड़े काम के लिए अनुशासन जरूरी है, कोचिंग संस्थान आप को अनुशासन में डालने का काम करते हैं । क्लास का समय निश्चित होता है । इन सबका पालन करने से आपकी दिनचर्या मर्यादित हो जाती है । निश्चित रूप से इसका लाभ तैयारी करने में मिलती ही है । कोचिंग अध्यापकों की सशक्त टीम होती है । जिसमें अलग-अलग विषयों की विषय विशेषज्ञ आपकी ज्ञानरूपी धार को तेज करने का प्रयास करते हैं जरूरत है । आपकी दृढ़ संकल्प कि आप अपने गुरुजनों पर विश्वास करें व नियमित उनकी कक्षा में आएँ वह एकाग्रचित होकर अध्ययन करें । यह एक टीम वर्क है इसमें प्रत्येक विषय विशेषज्ञ की भूमिका महत्वपूर्ण है।

आइए मिलकर अभिज्ञान के साथ एक प्रयास करें और विजय श्री का तिलक लगाएं ।

धन्यवाद!
निदेशक|
संदीप चौधरी

करत करत अभ्यास के, जड़मति होत सुजान।
रसरी आवत जात, ते सिल पर परत निशान।।